जिले में दीपदान और उत्सव का विशेष माहौल रहा। यह मान्यता है कि यहीं श्री राम ने रावण वध के बाद ब्रह्म हत्या का पाप धोने के लिए गोमती नदी में स्नान किया और दीपदान किया, जिससे दिवाली मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस वजह से, दियरा, धोपाप धाम और अन्य पवित्र स्थलों पर हज़ारों दीपक जलाकर उत्सव मनाया गया।
- दियरा घाट: इस घाट पर दीपावली से जुड़ी मान्यताओं के कारण विशेष महत्व है। यहां दीपदान किया गया।
- धोपाप धाम: गोमती नदी के किनारे स्थित यह स्थान भी इस परंपरा का हिस्सा है। यहां भी बड़ी संख्या में दीपक जलाए गए।
- अन्य स्थान: विजथुआ धाम जैसे अन्य धार्मिक स्थलों पर भी हनुमान जी का पूजन और दीप प्रज्वलन के साथ उत्सव मनाया गया।
- समग्र उत्सव: सुल्तानपुर में दिवाली का माहौल धार्मिक और पारंपरिक महत्व के साथ-साथ हर्षोल्लास का था, जिसमें ग्रामीण अंचल भी शामिल थे।
